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Self Respect vs Ego

Self Respect vs Ego

क्या आप इन दोनों शब्दों में कोई अंतर बता सकते हैं ?
शायद नहीं। 
क्योंकि ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलु हैं। 
दोस्तों, यह एक सच्ची कहानी है। इसलिए आप से निवेदन है कि अपने अपने विचार जरूर शेयर करें। 

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नन्ही परी - Little Fairy

दोस्तो, क्या आपने किसी परी से मुलाकात की है ? 
अगर आपका जवाब ना है तो कोई बात नहीं, मैं आपको एक नन्ही पारी के बारे में बताता हूँ। 
घबराइये नहीं, ये एक छोटी सी पर मीठी सी याद है जो मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूँ।
जब से ये नन्ही परी मेरी जिन्दगी में आई है, तब से में अपने आप को परमात्मा का प्रशाद समझने लगा हूँ।  जबकि पहले मैं कभी इतना खुशकिस्मत नहीं था।
मैंने उसके लिए कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं, ज़रा ग़ोर फरमाये।
एक कली सी कोमल लड़की, काँटों और फूलों से डरती। *** बोलने से वो कभी ना डरती, छुप - छुप कर आहें थी भरती। *** नाम था उसका सीधा - साधा, सूरत में थी बिलकुल राधा। *** जब से मेने उसे पाया है, मैं इस संसार का सबसे खुशनसीब व्यक्ति बन गया हूँ। दिन भर बस यही  सोचता और कहता हूँ :- मेरा दिन - मेरी रात भी नन्ही परी।  मेरा दिल - मेरी जान भी नन्ही पारी। मेरी गरिमा है मेरा गरूर। 
मेरा अरमान भी है नन्ही परी। मेरी दुनिआ - मेरा जहां भी नन्ही परी।
मेरी नन्ही परी ही मेरी बेटी और बेटा  है। मेरे लिए तो मेरी नन्ही परी ही  सब कुछ है।

रौशनी - The Light

दोस्तो, आज मैं आपको एक अपनी लिखी हुई कविता से रूबरू करवाता हूँ। यह कविता मेने साल नवम्बर 14, 2000 में लिखी थी। 
उस दिन पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म दिन था और संयोगवश दिपावली भी उस दिन थी। और उस रात मैं अपने घर की छत पर बैठ कर जगमगाती रौशनी का लुत्फ़ उठा रहा था कि 
मेरा मन कुछ उदास था उसदिन। अचानक मुझे यह कविता सूझी।

मेरी कविता का शीर्षक है "रौशनी"जग मग - जग मग जुगनू  जैसी।  चाँद की हो रौशनी।।
रंग - बिरंगे फूलोँ जैसी। तारों की हो रौशनी।।
मन को भाए - सब  को भाए।  किन दीपों की हो रौशनी।।
कभी तो हसाए - कभी तो रुलाए।  जाने कैसी हो तुम रौशनी।।
अगर आप को यह कविता अच्छी लगी तो कृपया अपने विचार लिखें। 

Welcome Post on Real Stories in Hindi

मैं आपका स्वागत करता हूँ अपने इस रियल हिंदी स्टोरी ब्लॉग पर।

क्या आप जानते है कि हिंदी भारत की एक बहुत ही लोकप्रिय भाषा है?

अगर हाँ,

तो बताइए कि इंग्लिश के शब्द HINDI का स्वर हिंदी में एक समान क्यों है?

मैं ये आप लोगों पर छोड़ता हूँ  और आशा करता हूँ के आप इसका अंतर जानते होंगे। अगर आप नहीं जानते तो इसका अंतर जानने के लिए कृपया कमेंट में लिखिए।

इस ब्लॉग को शुरू करने का कारण यह है कि मैं इंग्लिश भाषा में निपुण नहीं हूँ , फिर भी मैं 15 से ज्यादा ब्लॉग्स पर लिख रहा हू,

और मेरे ज़हन में बहुत सी बातें हैं जो खुल कर लिखनी पड़ती है, पर मैं इंग्लिश में नहीं लिख पाता।

मैं आपको विशवास दिलाता हूँ कि मेरी यह कहानिया कुछ सच्ची और कुछ काल्पनिक हैं जो कि  आप को पसंद आएंगी।

कृपया अपने सुझाव अवश्य लिखें।

महेंदर पॉल वर्मा 
एडमिन 
रियल हिंदी स्टोरी