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ज़िन्दगी की विदाई - Departure of Life

ज़िन्दगी की विदाई - सुनने में तो साधारण सा वाक्य लगता है। पर ज़रा ग़ौर से पढ़िए और सोचिए, इस लाइन के मायने ही बदल जायेंगे। 

क्या कभी आपने ज़िन्दगी को अलविदा कहा है ?
अगर हाँ, तो बताइए कि आपको उस वख़्त कैसा महसूस हुआ ?

ज़िन्दगी की विदाई उस वख़्त हो जाती है जब किसी के दिल में किसी के लिए हमदर्दी, करुणा, प्यार और दया का भाव ख़त्म हो जाता है।

और सच बात ये है कि आज कल हर कोई सिर्फ आप के बारे में ही सोचता है।  हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी हर ख्वाहिश पूरी होनी चाहिए। दूसरों को इससे क्या नुक्सान होगा, इसकी किसे परवाह। 

ऐसे लोगों में मैं भी आता हूँ और शायद आप सब भी। 
क्या मैं कोई ग़लत  कह रहा हूँ ?

असल मायने में तो ज़िन्दगी की विदाई हो चुकी है और हम सबको इसे बस अलविदा ही कहना है। 

मैं तो ज़िन्दगी को अलविदा कह चुका अब देखना ये है की ज़िन्दगी मुझे कब अलविदा कहती है या मेरी ज़िन्दगी की विदाई कब है। 

दोस्तो, ज़िन्दगी को ले कर ये है मेरी सोच, और आपकी सोच क्या है?
क्या आप भी ज़िन्दगी को मेरे नज़रिए से ही देखते हैं ?

आप अपने विचार दे सकते हैं। 



महेन्दर पॉल वर्मा 
एडमिन 
रियल हिंदी स्टोरीज़ 

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महेन्दर पॉल वर्मा  एडमिन  रियल हिंदी स्टोरीज