Skip to main content

ज़िन्दगी की विदाई - Departure of Life

ज़िन्दगी की विदाई - सुनने में तो साधारण सा वाक्य लगता है। पर ज़रा ग़ौर से पढ़िए और सोचिए, इस लाइन के मायने ही बदल जायेंगे। 

क्या कभी आपने ज़िन्दगी को अलविदा कहा है ?
अगर हाँ, तो बताइए कि आपको उस वख़्त कैसा महसूस हुआ ?

ज़िन्दगी की विदाई उस वख़्त हो जाती है जब किसी के दिल में किसी के लिए हमदर्दी, करुणा, प्यार और दया का भाव ख़त्म हो जाता है।

और सच बात ये है कि आज कल हर कोई सिर्फ आप के बारे में ही सोचता है।  हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी हर ख्वाहिश पूरी होनी चाहिए। दूसरों को इससे क्या नुक्सान होगा, इसकी किसे परवाह। 

ऐसे लोगों में मैं भी आता हूँ और शायद आप सब भी। 
क्या मैं कोई ग़लत  कह रहा हूँ ?

असल मायने में तो ज़िन्दगी की विदाई हो चुकी है और हम सबको इसे बस अलविदा ही कहना है। 

मैं तो ज़िन्दगी को अलविदा कह चुका अब देखना ये है की ज़िन्दगी मुझे कब अलविदा कहती है या मेरी ज़िन्दगी की विदाई कब है। 

दोस्तो, ज़िन्दगी को ले कर ये है मेरी सोच, और आपकी सोच क्या है?
क्या आप भी ज़िन्दगी को मेरे नज़रिए से ही देखते हैं ?

आप अपने विचार दे सकते हैं। 



महेन्दर पॉल वर्मा 
एडमिन 
रियल हिंदी स्टोरीज़ 

Comments

Popular posts from this blog

रौशनी - The Light

दोस्तो, आज मैं आपको एक अपनी लिखी हुई कविता से रूबरू करवाता हूँ। यह कविता मेने साल नवम्बर 14, 2000 में लिखी थी। 
उस दिन पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म दिन था और संयोगवश दिपावली भी उस दिन थी। और उस रात मैं अपने घर की छत पर बैठ कर जगमगाती रौशनी का लुत्फ़ उठा रहा था कि 
मेरा मन कुछ उदास था उसदिन। अचानक मुझे यह कविता सूझी।

मेरी कविता का शीर्षक है "रौशनी"जग मग - जग मग जुगनू  जैसी।  चाँद की हो रौशनी।।
रंग - बिरंगे फूलोँ जैसी। तारों की हो रौशनी।।
मन को भाए - सब  को भाए।  किन दीपों की हो रौशनी।।
कभी तो हसाए - कभी तो रुलाए।  जाने कैसी हो तुम रौशनी।।
अगर आप को यह कविता अच्छी लगी तो कृपया अपने विचार लिखें। 

बदलते रिश्ते - The Changing Relations

बदलते रिश्ते - एक कड़वा सच जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा।जी हाँ, यह  सिर्फ मेरी नहीं बल्कि हम सब की है।  और जहाँ तक मेरा ख्याल है, ऐसा सिर्फ भारत में ही होता है। 
क्या कभी आपने सोचा है कि आपके परिवार वाले भी आपके खिलाफ साज़िश कर सकते है।  मैं दावे के साथ कह सकता हूँ के नहीं। 
पर यह सब सच है - एक कड़वा सच जो आपकी ज़िन्दगी बदल देगा और सोचने पर मज़बूर कर देगा कि क्या यही ज़िन्दगी है। 
मैं हर वख्त दूसरों के बारे में ही सोचता रहा और अपनी ज़िन्दगी बर्बाद कर ली। पर सब यही कहते हैं की तूने किया है।  लोग दूसरों का दिमाग तो पढ़ लेते हैं पर मेरा दिल कोई नहीं पढ़ पाया। 


अब तो मेरा दिल बस यही कहता है कि :- पंछिओं को आसमान से गिरते देखा है, अपनों के हाथों से अपनों को गिराते देखा है।  *-*-* लोग बेदर्द है जो अपने दिमाग से सोचते हैं, उम्र गुज़ार दी दिल से सोचते - सोचते, पर अफ़सोस,  मेने अपने रिश्तों को फिर भी बदलते देखा है। *-*-* क्या ये ही ज़िन्दगी है,  कि लोग एक पल में साथ छोड़ देते हैं, बीच सफर में अपने हाथ छोड़ देते हैं, ज़िंदगी का तो पता नहीं,  मेने मौत को साथ निभाते देखा है।  *-*-* उम्मीदों को पलते देखा है,  और सपनो को करवटें बद…

सच की कलम से - By the Pen of Truth

सच की कलम से, सुनने में तो अच्छा लगता है, पर क्या कलम सच बोलती है?

जरा सोचिए और बताइए क्या सच में कलम सच बोलती है? आज कल तो कलम वही लिखती है जो उससे लिखवाया जाता है। और वो ही लिखती है जिससे उसको लिखवाने वाले को कुछ फायदा होता है। 
क्यों मैं सच कह रहा हूँ ना? अगर हाँ तो अपने विचार मेरे साथ शेयर जरूर करें।  क्योंकि इस मुद्दे पर आपकी छोटी सी टिप्णी बहुत गहरा प्रभाव दाल सकती है। विश्वास कीजिए। 
कलम बैचारी कुर्सी की मारी। शायद ये मोहावरा तो आपने सुना ही होगा। हाँ थोड़ा सा हटके जरूर है पर करता तो कलम की मजबूरी को ब्यान ही है ना। 
आप को नहीं लगता के कलम अब ग़लत  हाथों में है ? अगर आप मेरे सवालों से इत्तेफ़ाक़ रखतें हैं या आप कुछ रौशनी डालना चाहते हैं तो अपने विचार जरूर शेयर करें। 
आपका अपना क्रिएटिव राईटर,
महेन्दर पॉल वर्मा  एडमिन  रियल हिंदी स्टोरीज