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Welcome Post on Real Stories in Hindi

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मैं आपका स्वागत करता हूँ अपने इस रियल हिंदी स्टोरी ब्लॉग पर।

क्या आप जानते है कि हिंदी भारत की एक बहुत ही लोकप्रिय भाषा है?


अगर हाँ,


तो बताइए कि इंग्लिश के शब्द HINDI का स्वर हिंदी में एक समान क्यों है?


मैं ये आप लोगों पर छोड़ता हूँ  और आशा करता हूँ के आप इसका अंतर जानते होंगे। अगर आप नहीं जानते तो इसका अंतर जानने के लिए कृपया कमेंट में लिखिए।


इस ब्लॉग को शुरू करने का कारण यह है कि मैं इंग्लिश भाषा में निपुण नहीं हूँ , फिर भी मैं 15 से ज्यादा ब्लॉग्स पर लिख रहा हू,


और मेरे ज़हन में बहुत सी बातें हैं जो खुल कर लिखनी पड़ती है, पर मैं इंग्लिश में नहीं लिख पाता।


मैं आपको विशवास दिलाता हूँ कि मेरी यह कहानिया कुछ सच्ची और कुछ काल्पनिक हैं जो कि  आप को पसंद आएंगी।


कृपया अपने सुझाव अवश्य लिखें।


महेंदर पॉल वर्मा 
एडमिन 
रियल हिंदी स्टोरी 

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नन्ही परी - Little Fairy

दोस्तो, क्या आपने किसी परी से मुलाकात की है ? 
अगर आपका जवाब ना है तो कोई बात नहीं, मैं आपको एक नन्ही पारी के बारे में बताता हूँ। 
घबराइये नहीं, ये एक छोटी सी पर मीठी सी याद है जो मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूँ।
जब से ये नन्ही परी मेरी जिन्दगी में आई है, तब से में अपने आप को परमात्मा का प्रशाद समझने लगा हूँ।  जबकि पहले मैं कभी इतना खुशकिस्मत नहीं था।
मैंने उसके लिए कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं, ज़रा ग़ोर फरमाये।
एक कली सी कोमल लड़की, काँटों और फूलों से डरती। *** बोलने से वो कभी ना डरती, छुप - छुप कर आहें थी भरती। *** नाम था उसका सीधा - साधा, सूरत में थी बिलकुल राधा। *** जब से मेने उसे पाया है, मैं इस संसार का सबसे खुशनसीब व्यक्ति बन गया हूँ। दिन भर बस यही  सोचता और कहता हूँ :- मेरा दिन - मेरी रात भी नन्ही परी।  मेरा दिल - मेरी जान भी नन्ही पारी। मेरी गरिमा है मेरा गरूर। 
मेरा अरमान भी है नन्ही परी। मेरी दुनिआ - मेरा जहां भी नन्ही परी।
मेरी नन्ही परी ही मेरी बेटी और बेटा  है। मेरे लिए तो मेरी नन्ही परी ही  सब कुछ है।

ज़िन्दगी का अंत - Death of Life

क्या आप को पता है की ज़िन्दगी का अंत कब होता है ?
आप लोग सोच रहे होंगे कि ये कैसा प्रश्न है जिसका सीधा सा उत्तर है।

पर आप ग़लत सोच रहें हैं।

क्योंकि मरना ही ज़िन्दगी का अंत नहीं होता।

मरने से पहले भी लोग हर दिन मरते है पर असल मायने में मरना तो वो है जो किसी को मरने के बाद भी याद किया जाए। 

ज़िन्दगी बहुत छोटी है पर आप उसको बड़ा कर सकते हैं। 



कैसे ?


यह बहुत आसान है, बस आप को कुछ बातों का ख्याल रखना होगा।
हमेशा परमात्मा को याद रखो। परमात्मा है, इसलिए हम हैं। हमेशा मुस्कुराते रहो। कभी कटु वचन मत बोलो। हमेशा दूसरों की मदत  के लिए आगे आओ। हमेश अच्छी बाते करो और उन बातों को ही अपने ज़हम में रखो। कभी दूसरों की बुराई मत करो। दूसरो की ग़लतियों को नज़र अंदाज़ करो। कोई छोटा या बड़ा नहीं होता और सबकी इज़्ज़त करो। अगर आप ये सब बातें हमेश याद रखते हो तो आप हमेशा लोगो के दिलों में रहेंगे और ज़िन्दगी के अंत के बाद भी ज़िंदा रहेंगे। अब बात करते हैं कि ज़िन्दगी का अंत कब होता है ?
आप और हम सब खुशनसीब हैं जो हमारे पास परमात्मा का दिया सब कुछ है। पर क्या आप जानते हैं कि बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो कि एक वख़्त के खाने के लिए तरसते है…

ज़िन्दगी की विदाई - Departure of Life

ज़िन्दगी की विदाई - सुनने में तो साधारण सा वाक्य लगता है। पर ज़रा ग़ौर से पढ़िए और सोचिए, इस लाइन के मायने ही बदल जायेंगे। 

क्या कभी आपने ज़िन्दगी को अलविदा कहा है ?
अगर हाँ, तो बताइए कि आपको उस वख़्त कैसा महसूस हुआ ?

ज़िन्दगी की विदाई उस वख़्त हो जाती है जब किसी के दिल में किसी के लिए हमदर्दी, करुणा, प्यार और दया का भाव ख़त्म हो जाता है।

और सच बात ये है कि आज कल हर कोई सिर्फ आप के बारे में ही सोचता है।  हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी हर ख्वाहिश पूरी होनी चाहिए। दूसरों को इससे क्या नुक्सान होगा, इसकी किसे परवाह। 

ऐसे लोगों में मैं भी आता हूँ और शायद आप सब भी। 
क्या मैं कोई ग़लत  कह रहा हूँ ?

असल मायने में तो ज़िन्दगी की विदाई हो चुकी है और हम सबको इसे बस अलविदा ही कहना है। 

मैं तो ज़िन्दगी को अलविदा कह चुका अब देखना ये है की ज़िन्दगी मुझे कब अलविदा कहती है या मेरी ज़िन्दगी की विदाई कब है। 

दोस्तो, ज़िन्दगी को ले कर ये है मेरी सोच, और आपकी सोच क्या है?
क्या आप भी ज़िन्दगी को मेरे नज़रिए से ही देखते हैं ?

आप अपने विचार दे सकते हैं। 



महेन्दर पॉल वर्मा 
एडमिन 
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