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सच की कलम से - By the Pen of Truth

सच की कलम से, सुनने में तो अच्छा लगता है, पर क्या कलम सच बोलती है?


जरा सोचिए और बताइए क्या सच में कलम सच बोलती है? आज कल तो कलम वही लिखती है जो उससे लिखवाया जाता है। और वो ही लिखती है जिससे उसको लिखवाने वाले को कुछ फायदा होता है। 

क्यों मैं सच कह रहा हूँ ना?
अगर हाँ तो अपने विचार मेरे साथ शेयर जरूर करें।  क्योंकि इस मुद्दे पर आपकी छोटी सी टिप्णी बहुत गहरा प्रभाव दाल सकती है। विश्वास कीजिए। 

कलम बैचारी कुर्सी की मारी। शायद ये मोहावरा तो आपने सुना ही होगा। हाँ थोड़ा सा हटके जरूर है पर करता तो कलम की मजबूरी को ब्यान ही है ना। 

आप को नहीं लगता के कलम अब ग़लत  हाथों में है ? अगर आप मेरे सवालों से इत्तेफ़ाक़ रखतें हैं या आप कुछ रौशनी डालना चाहते हैं तो अपने विचार जरूर शेयर करें। 

आपका अपना क्रिएटिव राईटर,

महेन्दर पॉल वर्मा 
एडमिन 
रियल हिंदी स्टोरीज 

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नन्ही परी - Little Fairy

दोस्तो, क्या आपने किसी परी से मुलाकात की है ? 
अगर आपका जवाब ना है तो कोई बात नहीं, मैं आपको एक नन्ही पारी के बारे में बताता हूँ। 
घबराइये नहीं, ये एक छोटी सी पर मीठी सी याद है जो मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूँ।
जब से ये नन्ही परी मेरी जिन्दगी में आई है, तब से में अपने आप को परमात्मा का प्रशाद समझने लगा हूँ।  जबकि पहले मैं कभी इतना खुशकिस्मत नहीं था।
मैंने उसके लिए कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं, ज़रा ग़ोर फरमाये।
एक कली सी कोमल लड़की, काँटों और फूलों से डरती। *** बोलने से वो कभी ना डरती, छुप - छुप कर आहें थी भरती। *** नाम था उसका सीधा - साधा, सूरत में थी बिलकुल राधा। *** जब से मेने उसे पाया है, मैं इस संसार का सबसे खुशनसीब व्यक्ति बन गया हूँ। दिन भर बस यही  सोचता और कहता हूँ :- मेरा दिन - मेरी रात भी नन्ही परी।  मेरा दिल - मेरी जान भी नन्ही पारी। मेरी गरिमा है मेरा गरूर। 
मेरा अरमान भी है नन्ही परी। मेरी दुनिआ - मेरा जहां भी नन्ही परी।
मेरी नन्ही परी ही मेरी बेटी और बेटा  है। मेरे लिए तो मेरी नन्ही परी ही  सब कुछ है।

ज़िन्दगी का अंत - Death of Life

क्या आप को पता है की ज़िन्दगी का अंत कब होता है ?
आप लोग सोच रहे होंगे कि ये कैसा प्रश्न है जिसका सीधा सा उत्तर है।

पर आप ग़लत सोच रहें हैं।

क्योंकि मरना ही ज़िन्दगी का अंत नहीं होता।

मरने से पहले भी लोग हर दिन मरते है पर असल मायने में मरना तो वो है जो किसी को मरने के बाद भी याद किया जाए। 

ज़िन्दगी बहुत छोटी है पर आप उसको बड़ा कर सकते हैं। 



कैसे ?


यह बहुत आसान है, बस आप को कुछ बातों का ख्याल रखना होगा।
हमेशा परमात्मा को याद रखो। परमात्मा है, इसलिए हम हैं। हमेशा मुस्कुराते रहो। कभी कटु वचन मत बोलो। हमेशा दूसरों की मदत  के लिए आगे आओ। हमेश अच्छी बाते करो और उन बातों को ही अपने ज़हम में रखो। कभी दूसरों की बुराई मत करो। दूसरो की ग़लतियों को नज़र अंदाज़ करो। कोई छोटा या बड़ा नहीं होता और सबकी इज़्ज़त करो। अगर आप ये सब बातें हमेश याद रखते हो तो आप हमेशा लोगो के दिलों में रहेंगे और ज़िन्दगी के अंत के बाद भी ज़िंदा रहेंगे। अब बात करते हैं कि ज़िन्दगी का अंत कब होता है ?
आप और हम सब खुशनसीब हैं जो हमारे पास परमात्मा का दिया सब कुछ है। पर क्या आप जानते हैं कि बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो कि एक वख़्त के खाने के लिए तरसते है…

ज़िन्दगी की विदाई - Departure of Life

ज़िन्दगी की विदाई - सुनने में तो साधारण सा वाक्य लगता है। पर ज़रा ग़ौर से पढ़िए और सोचिए, इस लाइन के मायने ही बदल जायेंगे। 

क्या कभी आपने ज़िन्दगी को अलविदा कहा है ?
अगर हाँ, तो बताइए कि आपको उस वख़्त कैसा महसूस हुआ ?

ज़िन्दगी की विदाई उस वख़्त हो जाती है जब किसी के दिल में किसी के लिए हमदर्दी, करुणा, प्यार और दया का भाव ख़त्म हो जाता है।

और सच बात ये है कि आज कल हर कोई सिर्फ आप के बारे में ही सोचता है।  हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी हर ख्वाहिश पूरी होनी चाहिए। दूसरों को इससे क्या नुक्सान होगा, इसकी किसे परवाह। 

ऐसे लोगों में मैं भी आता हूँ और शायद आप सब भी। 
क्या मैं कोई ग़लत  कह रहा हूँ ?

असल मायने में तो ज़िन्दगी की विदाई हो चुकी है और हम सबको इसे बस अलविदा ही कहना है। 

मैं तो ज़िन्दगी को अलविदा कह चुका अब देखना ये है की ज़िन्दगी मुझे कब अलविदा कहती है या मेरी ज़िन्दगी की विदाई कब है। 

दोस्तो, ज़िन्दगी को ले कर ये है मेरी सोच, और आपकी सोच क्या है?
क्या आप भी ज़िन्दगी को मेरे नज़रिए से ही देखते हैं ?

आप अपने विचार दे सकते हैं। 



महेन्दर पॉल वर्मा 
एडमिन 
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