Skip to main content

सच की कलम से - By the Pen of Truth

सच की कलम से, सुनने में तो अच्छा लगता है, पर क्या कलम सच बोलती है?


जरा सोचिए और बताइए क्या सच में कलम सच बोलती है? आज कल तो कलम वही लिखती है जो उससे लिखवाया जाता है। और वो ही लिखती है जिससे उसको लिखवाने वाले को कुछ फायदा होता है। 

क्यों मैं सच कह रहा हूँ ना?
अगर हाँ तो अपने विचार मेरे साथ शेयर जरूर करें।  क्योंकि इस मुद्दे पर आपकी छोटी सी टिप्णी बहुत गहरा प्रभाव दाल सकती है। विश्वास कीजिए। 

कलम बैचारी कुर्सी की मारी। शायद ये मोहावरा तो आपने सुना ही होगा। हाँ थोड़ा सा हटके जरूर है पर करता तो कलम की मजबूरी को ब्यान ही है ना। 

आप को नहीं लगता के कलम अब ग़लत  हाथों में है ? अगर आप मेरे सवालों से इत्तेफ़ाक़ रखतें हैं या आप कुछ रौशनी डालना चाहते हैं तो अपने विचार जरूर शेयर करें। 

आपका अपना क्रिएटिव राईटर,

महेन्दर पॉल वर्मा 
एडमिन 
रियल हिंदी स्टोरीज 

Comments

Popular posts from this blog

रौशनी - The Light

दोस्तो, आज मैं आपको एक अपनी लिखी हुई कविता से रूबरू करवाता हूँ। यह कविता मेने साल नवम्बर 14, 2000 में लिखी थी। 
उस दिन पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म दिन था और संयोगवश दिपावली भी उस दिन थी। और उस रात मैं अपने घर की छत पर बैठ कर जगमगाती रौशनी का लुत्फ़ उठा रहा था कि 
मेरा मन कुछ उदास था उसदिन। अचानक मुझे यह कविता सूझी।

मेरी कविता का शीर्षक है "रौशनी"जग मग - जग मग जुगनू  जैसी।  चाँद की हो रौशनी।।
रंग - बिरंगे फूलोँ जैसी। तारों की हो रौशनी।।
मन को भाए - सब  को भाए।  किन दीपों की हो रौशनी।।
कभी तो हसाए - कभी तो रुलाए।  जाने कैसी हो तुम रौशनी।।
अगर आप को यह कविता अच्छी लगी तो कृपया अपने विचार लिखें। 

परफैक्ट रिश्ता - The Perfect Relation

परफैक्ट रिश्ता - सुनने में तो अच्छा लगता है पर क्या सच में कोई रिश्ता परफैक्ट हो सकता है? इस सवाल का जवाब मैं आप पर छोड़ता हूँ।
पर मेरे ख़याल में कोई रिश्ता कभी परफैक्ट नहीं हो सकता क्योंकि हर रिश्ते के दो पहलू होते हैं।  एक अच्छा - A good side of Relationएक बुरा - A bad side of Relationअच्छे पहलू में लोग झूठ बोलते हैं, लोगो की झूठी तारीफ़ करते हैं और कई तरहं के झूठे पाखंड करते हैं। इसलिए दूसरों को अच्छे लगते हैं। 

बुरे पहलू में लोग सच बोलते हैं, लोगो की झूठी तारीफ़ नहीं करते और उनकी ज़िन्दगी की किताब एकदम पारदर्शी होती है। पर ऐसे लोग किसी को पसंद नहीं आते। 
जो लोग बुरे पहलू में आते हैं, उनका रिश्ता कभी परफैक्ट नहीं होता जबकि होना इसके विपरीत चाहिए। क्योंकि सच बोलना ही ज़िन्दगी है। 
मैं तो बुरे पहलू में ही आता हूँ इसलिए कभी किसीको पसंद नहीं आया, ना ही कभी मेरा कोई काम किसी को अच्छा लगा। और तो और मेरी पत्नी और उसके घरवाले भी मुझे पसंद नहीं करते। उनके लिए तो सिर्फ पैसा, रुतबा ही सब कुछ है, चाहे वो किसी को झूठ बोल कर ही हासिल किया हो।

पर मैं अपनी ज़िन्दगी से खुश हूँ। मुझे अब किसी से कोई शिकायत ही नही…