कभी किसी ने अपने साये से बात की है ? मैं अक्सर करता हूँ। क्योंकि मेरा साया ही मेरी पहचान है। मेरा साया ही मेरा दोस्त, रिश्तेदार है। आज मैं सचमे अकेला हूँ। क्या यही ज़िन्दगी है? अगर हाँ तो नहीं चाहिए ऐसी ज़िन्दगी जो किसी को अपना न बना सकी। किसी को अपने ज़ख्म दिखला ना सकी। बस अब बर्दाश्त नहीं होता। ख़त्म कर दो इस खोखली ज़िन्दगी को। कुछ देर अपने आप से बातें करके, मेरे अंदर से एक आवाज़ आई मेने सुना कि मेरा साया मुझसे बात कर रहा है और उसके सवालों ने मुझे झिंझोड़ कर रख दिया। मेरे साये ने मझे रुकने को कहा और मुझसे पूछा:- रुको, ये तुम क्या कर रहे हो? अपने आपको खत्म करने की सोच रहे हो। क्या कोई है जो तुम्हारी ज़िन्दगी से ज्यादा प्यारा है? क्या कोई है, जिसके बगैर तुम जी नहीं सकते? मेने कहा हाँ - हाँ कोई है जो मेरे बगैर नहीं जी सकता और मैं भी उसके बगैर नहीं जी सकता। मेरी ज़िन्दगी तो उसके लिए ही है। यह सुनकर मेरा साया ज़ोर से हंस पड़ा और मेरी आँखों से ओझल हो गया। अब मैं भ...