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About me

I have done my graduation in Bachelor of Computer Application from Ignou University, Delhi and attended classes at Punjab University Chandigarh.

After working in different MNCs, I am currently self employed. I have a office with multitasking under a single roof.

Apart from other tasks, I am a blogger and right now I am writing on 15+ blogs with different topics. 

These blogs include, current affairs, blogging how tos, technical blogs, stories - hindi & english etc.

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Mohinder Paul Verma
Blogger

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पती - पत्नी में फर्क - The Difference between Husband and Wife

पती - पत्नी में फर्क - इस वाक्य के कई मायने बनते हैं।  असल में यहां पर मैं सिर्फ दो के बारे में ही बात कर रहा हूँ।  पती  - पत्नी की कुशलता में फर्क  पती  - पत्नी के स्वभाव में फर्क  कारण चाहे जो भी हो, अगर दोनों में एक ज्यादा और एक कम है तो दोनों की लाइफ अधूरी है।  फिर चाहे वो दोनों एक दूसरे को कितना ही पसंद करते हों।  असल लाइफ में दोनों समान नहीं होते पर अगर दोनों की आपसी समझ या सोच मिलती है तो एक की कुशलता दूसरे की अकुशलता को कवर  लेती है।  इसी तरहं से अगर पती - पत्नी में एक दूसरे के लिए करुणा भाव है तो एक के गर्म स्वभाव को दूसरे का ठंडा स्वभाव बर्दाश्त कर लेता है और गर्म स्वभाव वाले को भी अपने जैसा करने की कोशिश करता है। 

ज़िन्दगी की विदाई - Departure of Life

ज़िन्दगी की विदाई - सुनने में तो साधारण सा वाक्य लगता है।  पर ज़रा ग़ौर से पढ़िए और सोचिए, इस लाइन के मायने  ही बदल जायेंगे।  क्या कभी आपने ज़िन्दगी को अलविदा कहा है ? अगर हाँ, तो बताइए कि आपको उस वख़्त  कैसा महसूस हुआ ? ज़िन्दगी की विदाई उस वख़्त हो जाती है जब किसी के दिल में किसी के लिए हमदर्दी, करुणा, प्यार और दया का भाव ख़त्म हो जाता है। और सच बात ये है कि आज कल हर कोई सिर्फ आप के बारे में ही सोचता है।  हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी हर ख्वाहिश पूरी होनी चाहिए। दूसरों को इससे क्या नुक्सान होगा, इसकी किसे परवाह।  ऐसे लोगों में मैं भी आता हूँ और शायद आप सब भी।  क्या मैं कोई ग़लत  कह रहा हूँ ? असल मायने में तो ज़िन्दगी की विदाई हो चुकी है और हम सबको इसे बस अलविदा ही कहना है।  मैं तो ज़िन्दगी को अलविदा कह चुका अब देखना ये है की ज़िन्दगी मुझे कब अलविदा कहती है या मेरी ज़िन्दगी की विदाई कब है।  दोस्तो, ज़िन्दगी को ले कर ये है मेरी सोच, और आपकी सोच क्या है? क्या आप भी ज़िन्दगी को मेरे नज़रिए से ही देखते हैं ? आप अपने विचार दे सकते हैं।  महेन्दर पॉल वर्मा  एडमिन  रियल हिंदी स्टोर

नन्ही परी - Little Fairy

दोस्तो, क्या आपने किसी परी से मुलाकात की है ?  अगर आपका जवाब ना है तो कोई बात नहीं, मैं आपको एक नन्ही पारी के बारे में बताता हूँ।  घबराइये नहीं, ये एक छोटी सी पर मीठी सी याद है जो मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूँ। जब से ये नन्ही परी मेरी जिन्दगी में आई है, तब से में अपने आप को परमात्मा का प्रशाद समझने लगा हूँ।  जबकि पहले मैं कभी इतना खुशकिस्मत नहीं था। मैंने उसके लिए कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं, ज़रा ग़ोर फरमाये। एक कली सी कोमल लड़की, काँटों और फूलों से डरती। *** बोलने से वो कभी ना डरती, छुप - छुप कर आहें थी भरती। *** नाम था उसका सीधा - साधा, सूरत में थी बिलकुल राधा। *** जब से मेने उसे पाया है, मैं इस संसार का सबसे खुशनसीब व्यक्ति बन गया हूँ।  दिन भर बस यही  सोचता और कहता हूँ :- मेरा दिन - मेरी रात भी नन्ही परी।  मेरा दिल - मेरी जान भी नन्ही पारी। मेरी गरिमा है मेरा गरूर।  मेरा अरमान भी है नन्ही परी। मेरी दुनिआ - मेरा जहां भी नन्ही परी। मेरी नन्ही परी ही मेरी बेटी और बेटा  है। मेरे लिए तो मेरी नन्ही परी ही  सब कुछ है।